एक लंबी तू श्वास भर, और मुझ पर तू विश्वास कर। बढ़ा कदम और रख धरा पर, ना किसी की आस कर। क्यों बन रहा तू दास भर? ना दुनिया को बर्दाश्त कर। जा, चूम अम्बर के शिखर को, ना किसी की आस कर। अश्रुओं का नाश कर,
A restless man lived at the edge of a town. He read books, debated ideas, and prided himself on needing proof before belief. But for all his thinking, there was something inside him that never quieted
किसी उलझन को सुलझाऊँ, किसी छाँव के नीचे, जहाँ धूप पहुँच न सके, जीवन की उम्मीद न घटे। वहाँ बैठ मैं जीवन की किसी उलझन को सुलझाऊँ। जहाँ मंज़िल न हो, न हो कोई मुसाफ़िर, हो तो केवल मेरा अहसास, उस राह को पा
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